Enter your email address: Delivered by FeedBurner ओम शांति 🔱 14 जुलाई 2020 🔱 👁️ स्वमान: मैं त्रिनेत्री हूँ। 👁️ ☘️ ज्ञान का तीसरा नेत्र खुलना माना रुहानी दृष्टि, रूह समझ रूह को देखना, रूहानी स्मृतियों में रहना। ☘️जब ये स्मृतियां जागृत होती है तो ऐसा अनुभव होता है जैसे आत्मा को आंख मिल गई है, भटकना छूट जाता है, हम असत्य की राह छोड़ सत्य की राह पर चल पड़ते हैं। ☘️ यह ज्ञान दुनिया में किसी को नहीं। तो जब हमारी तीसरी आंख खुलती है तब हम अनेकों की आंख खोलने का कारण बनते हैं । ☘️🔱🍁☘️🔱🍁☘️ 👁️ अभ्यास 👁️ 🔱 7:00 से 10:00 बजे ☘️मैं आत्माहूँ, बिंदी हूं। ☘️शांति मेरा स्वधर्म है ☘️ मन,बुद्धि मेरे ऑर्गन्स है ☘️आत्मा शरीर में प्रवेश करती है, सजावट शरीर की होती है। ☘️🔱🍁☘️🔱🍁☘️ 🔱 10:00 से 1:00 बजे देही अभिमानी बन महसूस करें: ☘️बाबा मुझ आत्मा को देख रहे हैं, मुझे वर्थ पाउंड💎 बना रहे हैं ☘️बाबा बागवान बन मुझ आत्मा फ्लावर को कृष्ण जैसा मोस्ट ब्यूटीफुल बना रहे हैं। ☘️मुरली रिवीजन ☘️🔱🍁☘️🔱🍁☘️🍁 🔱 1:00 से 5:00 बजे मम्मा और...