Enter your email address: मैल पर फीड बर्नर से प्राप्त लिंक Verify करे बाबा कहते हैं … बच्चे, सर्व समर्पण हो जाओ … अर्थात् आप बच्चों के पास जो कुछ भी है, सब (बुद्धि से) परमात्मा बाप को सौंप दो…। मैं और मेरेपन में रहने वाली आत्मा ना ही ज्ञानी है … ना ही योगी … और ना ही धारणा स्वरूप बन सकती है। यदि किसी भी आत्मा के अन्दर minor सा भी मैं और मेरापन है, तो बाप-समान बनना असम्भव है। इसलिए बच्चे, मैं और मेरा … इसका त्याग करो…। सूक्ष्म रीति स्वयं की checking करो और change करते जाओ … निमित्त बन कर्म-व्यवहार में आओ, तब ही आप कर्म के प्रभाव से बचे रह सकते हो…। जब भी किसी तरह की ज़िम्मेवारी स्वयं की समझते हो तो आप उसमें फँस जाते हो … यदि उस कार्य की ज़िम्मेवारी कोई और सम्भाल लें, तो आप हल्के रह अन्य कार्य कर सकते हो…। और यहाँ तो स्वयं भगवान, बाप बन, आप बच्चों की ज़िम्मेवारी उठाने आ गया…! फिर आपका कर्तव्य केवल बाप के कार्य में सहयोगी बनना ही है … और इतने बड़े कार्य में सहयोगी केवल ज्ञान स्वरूप … योग स्वरूप … और धारणा स्वरूप आत्मा ही बन सकती है…। परमात्मा बाप के कार्य में स...